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कंप्यूटर का परिचय (Introduction to Computers in Hindi)

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  कंप्यूटर का परिचय (Introduction to Computers in Hindi) Computer क्या है Computer का Full Form होता है Computer के पार्ट्स के नाम और कंप्यूटर के जनक कौन हैं यह प्रश्‍न अगर आपके दिमाग में हैं तो यह जानकारी के लिये ही है कंप्यूटर किसे कहते है इसकी पूरी जानकारी हिंदी में आपको यहां दी गयी है कंप्‍यूटर क्‍या है – What is Computer कंप्यूटर शब्द अंग्रेजी के “Compute” शब्द से बना है, जिसका अर्थ है “गणना”, करना होता है इसीलिए इसे गणक या संगणक भी कहा जाता है, इसका अविष्‍कार Calculation करने के लिये हुआ था, पुराने समय में Computer का use केवल Calculation करने के लिये किया जाता था किन्‍तु आजकल इसका use डाक्‍यूमेन्‍ट बनाने, E-mail, listening and viewing audio and video, play games, database preparation के साथ-साथ और कई कामों में किया जा रहा है, जैसे बैकों में, शैक्षणिक संस्‍थानों में, कार्यालयों में, घरों में, दुकानों में, Computer का उपयोग बहुतायत रूप से किया जा रहा है Computer केवल वह काम करता है जो हम उसे करने का कहते हैं यानी केवल वह उन Command को फॉलो करता है जो पहले से computer के अन्‍दर...

फिर भी न जाने क्यू पिता पीछे रहा जाता है.

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फिर भी न जाने क्यू पिता पीछे रह जाता है.  माँ   , नौ  महीने पालती है  पिता 25 साल पालता है.  फिर भी न जाने क्यू पिता पीछे  रह  जाता है.  माँ   बिना तनख्याह घर का सारा  काम करती है  पिता पूरी कमाई घर पर लुटा देता है.  फिर भी न जाने क्यू पिता पीछे  रह  जाता है.  माँ   जो चाहते हो वो बनाती के देती है. पिता जो चाहते हो वो ला के देता है . .फिर भी न जाने क्यू पिता पीछे  रह  जाता है.  माँ   को याद करते हो जब चोट लगती है  पिता को याद करते हो जब जरुरत पड़ती है.  फिर भी न जाने क्यू पिता पीछे  रह  जाता है.  माँ और बच्चो की आलमारी नए कपड़ो से भरा है  पिता कई सालो तक पुराने कपड़े चलाता है.  फिर भी न जाने क्यू पिता पीछे  रह  जाता है.  ABOUT  THE  AUTHOR Akhilesh Pal दोस्तों, मेरा नाम अखिलेश पाल है एवं मैं AS-Enterprises1 blog का फाउंडर एंड ऑथर हूँ | मैं इस ब्लॉग पर technical topics,law, Education Spiritual - आध्यात्मिक ब्लॉग ...

प्रेमी और संत दोनों अधूरे होते हैं

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                                      प्रेमी और संत दोनों अधूरे होते हैं जिन लोगों ने रिश्तों को चुना, वे सांसारिक कहे गए और जिन्होंने अकेलेपन को चुना वो अलौकिक संत कहलाए. पर दोनों पीड़ित हैं क्योंकि दोनों अधूरे हैं और अधूरा होना हमेशा तकलीफभरा होता है. पूरा होने के लिए स्वस्थ और खुश रहना पड़ता है. जबकि अधूरा होना तकलीफभरा इसलिए है क्योंकि दूसरे आधे हिस्से में हमेशा उथल-पुथल मची रहती है. वह हमेशा बदला लेने की तैयारी में लगा रहता है. इस भावना से आप क्षीण, कमजोर और थका हुआ महसूस करने लगते हैं. कभी कभी ये थकान आनंदमयी या खुशनुमा होती है, पर हर प्रकार के उत्साह में थकान होती जरूर है. इस थकान से यह रिश्ता काफी खूबसूरत था पर अब आप खुद को अकेलेपन की ओर ले जाना चाहेंगे, ताकि आप खुद को फिर से समेट सकें. आप फिर से ऊर्जा से ओत प्रोत हो सकें और आप फिर से अपने अस्तित्व में अपनी जड़ तलाश सके. जब आप किसी के साथ प्यार में होते हैं तो, आप दूसरे के अस्तित्व में समाहित हो जाते हैं और खुद से आपका संपर्क टूट जाता है....

बुरी आदतों से छुटकारा कैसे पायें

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                                                      बुरी आदतों से छुटकारा कैसे पायें प्रश्न: ‘अपने जीवन में तुम जिस भी चीज़ के ख़िलाफ़ हो जाते हो, उस से छुटकारा नहीं पा सकते,’इस ज्ञानोक्ति को मैं समझ नहीं पा रहा हूं। क्या सिगरेट पीने की इच्छा हो तो उसे पूरा करना ठीक होगा, या फिर किसी बीमार व्यक्ति की बहुत अधिक कॉफ़ी पीने की इच्छा हो तो उसे पूरा करना चाहिये? श्री श्री रवि शंकर: तुम्हारा मतलब है कि अगर तुम अपने जीवन में सिगरेट छोड़ना चाहते हो, सिगरेट के ख़िलाफ़ हो, तब भी सिगरेट पीने की इच्छा रहती है। इस से बाहर कैसे निकले, यह पूछ रहे हो? जब तुम यह अनुभव करते हो कि सिगरेट ना पीने में जो सुख है, वह सिगरेट पीने के सुख से अधिक है, तब यह स्वाभाविक रूप से छूट जाती है! मन हमेशा वहीं जाता है जहां उसे कुछ सुख की आशा होती है। सुख की आशा में मन वहां भी चला जाता है जहां सुख है ही नहीं! तो, मन आदतों का ग़ुलाम हो जाता है, और इन आदतों से कोई सुख नहीं मिलता, दुख ही मि...

एक ब्रह्मचारी की तरह जीने का तरीका

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                                            एक ब्रह्मचारी की तरह जीने का तरीका प्रश्न : नमस्कारम, गुरु। ब्रह्मचर्य के मार्ग पर क्या करना पड़ता है और किसी को कैसे मालूम हो कि वह उसके योग्य है कि नहीं ?  गुरु: ब्रह्मचर्य का अर्थ है एक मंद पवन, बयार की तरह होना -- इसका मतलब है कि आप कहीं पर भी, ठहरते नहीं हैं। हवा हर जगह जाती है लेकिन हम नहीं जानते कि इस समय ये कहाँ से आ रही है ? इसने अभी समुद्र को पार किया और यहाँ आयी। ये अभी यहाँ है और अब आगे बह रही है। ब्रह्मचर्य का अर्थ है, बस जीवन होना -- वैसे जीना जैसे आप जन्में थे--अकेले ! अगर आप की मां ने जुड़वाँ बच्चों को भी जन्म दिया था, तो भी आप तो अकेले ही आये थे। ब्रह्मचर्य का अर्थ है -- दिव्यता से अत्यंत निकटता से जुड़ना, और वैसे ही जीना। दिव्य के पथ पर आगे बढ़ने का तरीका ब्रह्मचर्य कोई महान कदम नहीं है। यह तो बस वैसे ही रहना है, जैसे जीवन है। शादी, विवाह एक बड़ा कदम है -- आप कुछ बहुत बड़ा करने का प्रयत्न कर रहे हैं। कम से कम लोगों क...

राम से बड़ा ‘राम’ का नाम .... प्रभु के इस ‘महामंत्र’ के जाप से दूर होगी हर विपत्ती

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  राम से बड़ा ‘राम’ का नाम .... प्रभु के इस ‘महामंत्र’ के जाप से दूर होगी हर विपत्ती श्रीराम का नाम श्रीराम के नाम के भीतर जीवन का शाश्वत सत्य छिपा है...जीवन की रूपरेखा, जीवन का सार... सब ‘राम’ ही हैं। इसलिए जो व्यक्ति राम की शरण में चला जाता है वहीं प्रभु उसकी तमाम परेशानियों को स्वयं हर लेते हैं। और जिसे राम का साथ नहीं मिलता वह व्यक्ति कहीं का नहीं रहता.... रामायण रामायण के एक प्रसंग के अनुसार जब लंका पहुंचने के लिए सेतु बांधा जा रहा था तब वानर सेना सेतु के हर पत्थर पर राम लिखने के बाद ही उसे बांध रही थी। यह देख प्रभु राम ने सोचा कि क्यों ना मैं ही पत्थर बांध दूं... पथर को नदी में तैरा दूं...। उन्होंने जैसे ही एक पत्थर पानी एमं फेंका वह डूब गया। प्रसंग वह बेहद परेशान हुए... उन्हें परेशान देख उनके सेवक और परम भक्त हनुमान जी उनके पास आए और इस परेशानी का कारण पूछा। तब श्रीराम ने उन्हें बताया कि तुम लोग मेरा नाम लिखकर पत्थर को पानी में फेंक रहे हों और वह तैर रहा है... जब मैं खुद पत्थर फेंकता हूं तो वह पत्थर डूब जाता है!! हनुमान जी हंसे और बोले... जिसे राम ने ही छोड़ दिया वह भला कैसे त...

स्वर्ग की खोज

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                                                         स्वर्ग की खोज..  पूरी हो जाएगी स्वर्ग की खोज, जब दिव्य मनुष्य पूरा होगा इंसानियत इसलिए खत्म हो रही है क्योंकि हमने अपने दिल और दिमाग को अलग कर दिया है; या यूं कहें कि सोच से भावनाओं को अलग कर दिया है; या सीधे शब्दों में यूं कि दिमाग दिल पर हावी हो गया है. दिल और दिमाग की स्थिति को भावनात्मक संतुलन की स्थिति भी नहीं कही जा सकती क्योंकि (ये संतुलन स्थापित करना भी नहीं कहा जा सकता) संतुलित व्यक्तित्व की हमेशा ही जीत होती है जबकि असंतुलन हमेशा असफलता का ही कारण बनता है हम अपने आंतरिक और बाह्य व्यक्तित्व को अलग-अलग नहीं बांट सकते....वो एक ही हैं --- दो हाथ, दो पैर, दो आंखें हैं जो एक साथ ही पूरे हैं, वरना अधूरे हैं. दुनिया को एक नई सोच, एक नया नजरिया अपनाने की जरूरत है -- एक ऐसी सोच जो जितना संभव हो वैज्ञानिक और आध्यात्मिक हो. इसे मैं क्रांति कहता हूं. वास्तव में दुनिया इसी क्रांति के इं...